इतिहास, शोध और स्थानीय इतिहास लेखन पर देशभर के विद्वानों का दो दिवसीय अकादमिक संगम
भागलपुर | 26–27 सितंबर 2026
भागलपुर नेशनल कॉलेज, भागलपुर में 26 एवं 27 सितंबर 2026 को आयोजित बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली (13वें) अधिवेशन का सफलतापूर्वक समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक आयोजन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से इतिहासकार, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी शामिल हुए और बिहार के इतिहास, इतिहास-लेखन, शोध-पद्धति तथा क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास से जुड़े विविध विषयों पर व्यापक विमर्श किया।
भव्य शुभारंभ से शुरू हुआ अकादमिक उत्सव
अधिवेशन का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद कुलध्वजारोहण, कुलगीत एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। भागलपुर नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों एवं अतिथियों का स्वागत किया।
अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने बिहार इतिहास परिषद् के गोल्डन जुबली अधिवेशन की मेजबानी को भागलपुर नेशनल कॉलेज के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय कुमार चौधरी तथा पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेकानंद सिंह की उपस्थिति एवं शैक्षणिक योगदान का विशेष उल्लेख किया।
अधिवेशन की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) चारू गुप्ता ने की। उन्होंने इतिहास और हिंदी साहित्य के पारस्परिक संबंध, इतिहास-लेखन में साहित्य की भूमिका तथा नारीवादी लेखन के महत्व पर विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि श्री राजेश वर्मा, माननीय सांसद, खगड़िया लोकसभा क्षेत्र ने बिहार की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत तथा सामाजिक एवं आर्थिक जीवन के साथ इतिहास के निरंतर संबंध पर अपने विचार रखे।
प्रो. (डॉ.) संजय कुमार चौधरी, कुलपति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने बिहार के इतिहास को गौरवपूर्ण विरासत बताते हुए बिहार इतिहास परिषद् के दीर्घकालीन शैक्षणिक एवं शोधपरक कार्यों की सराहना की। वहीं प्रो. (डॉ.) विवेकानंद सिंह, कुलपति, पूर्णिया विश्वविद्यालय ने इतिहास के अध्ययन में बदलते समय और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर चर्चा की तथा शिक्षण में AI को उपयोगी साधन के रूप में अपनाने की बात कही।
स्मृति व्याख्यान और पुस्तकों का लोकार्पण
अधिवेशन के प्रमुख अकादमिक आकर्षणों में प्रो. राम शरण शर्मा मेमोरियल अभिभाषण और प्रो. सुमित सरकार मेमोरियल अभिभाषण शामिल रहे।
प्रो. स्मिता सहगल, दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रो. राम शरण शर्मा के इतिहास-लेखन एवं उनके योगदान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। वहीं प्रो. हितेंद्र पटेल, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय ने प्रो. सुमित सरकार मेमोरियल अभिभाषण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर ‘Proceedings of Bihar Itihas Parishad’ का लोकार्पण भी किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण हुआ, जिनमें प्रो. रामलखन शुक्ला स्मृति पुस्तक, डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी की ‘मुगल हरम’, प्रो. अशोक अंशुमान एवं अन्य की ‘चंपारण में नील संघर्ष के सिपाही’, डॉ. शम्मा अंजुम की ‘मुगलकालीन प्रभावशाली महिलाओं की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति’ तथा डॉ. अंशुमान सुमन की ‘आधुनिक विश्व का इतिहास’ प्रमुख रहीं।
दूसरे दिन क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास पर विशेष विमर्श
अधिवेशन के दूसरे दिन विभिन्न प्रभागों में प्राचीन भारतीय इतिहास (बिहार), मध्यकालीन भारतीय इतिहास (बिहार), आधुनिक भारतीय इतिहास (बिहार) एवं समकालीन भारतीय इतिहास (बिहार) से संबंधित अकादमिक सत्र आयोजित किए गए।
विशेष आकर्षण रहा “क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास लेखन : समस्याएं एवं संभावनाएं” विषय पर आयोजित संगोष्ठी। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. हितेंद्र पटेल ने की। इसमें प्रो. अभय कुमार, डॉ. अंशुमान सुमन सहित विद्वानों ने क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास के स्रोतों, शोध-पद्धति, चुनौतियों तथा संभावनाओं पर विचार प्रस्तुत किए।
इस विमर्श ने स्थानीय इतिहास के दस्तावेजीकरण, क्षेत्रीय स्रोतों के संरक्षण और इतिहास-लेखन में स्थानीय अनुभवों एवं परंपराओं के समावेश की आवश्यकता को रेखांकित किया।
बिहार इतिहास परिषद् की नई कार्यकारिणी का गठन
गोल्डन जुबली अधिवेशन के दौरान बिहार इतिहास परिषद् की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।
नई कार्यकारिणी में प्रो. विशम्भर झा, दरभंगा को संरक्षक तथा प्रो. दीपक कुमार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली को जनरल प्रेसिडेंट बनाया गया।
प्रो. चारू गुप्ता, दिल्ली तथा प्रो. डॉ. ओ. पी. जायसवाल, पटना को उपाध्यक्ष, प्रो. (डॉ.) दयानन्द रॉय, भागलपुर को सचिव तथा प्रो. (डॉ.) अमरकांत सिंह, भागलपुर को कोषाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। प्रो. के. के. मंडल, भागलपुर एवं प्रो. रेणु कुमारी, मुजफ्फरपुर को संयुक्त सचिव बनाया गया।
विभिन्न ऐतिहासिक प्रभागों के लिए भी अध्यक्षों का चयन किया गया तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनेक विद्वानों को कार्यकारिणी में सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
विद्वानों और शोधार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी
अधिवेशन में बिहार के अतिरिक्त दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड, असम तथा देश के अन्य क्षेत्रों से आए इतिहासकारों एवं शोधार्थियों की सहभागिता रही।
दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. (डॉ.) स्निग्धा सिंह, प्रो. (डॉ.) नीरजा सिंह एवं डॉ. पंकज कुमार झा तथा बाबा भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार अंशुमान सहित अनेक विद्वानों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की।
भागलपुर नेशनल कॉलेज परिवार का महत्वपूर्ण योगदान
इतने बड़े राष्ट्रीय अकादमिक आयोजन की सफलता में भागलपुर नेशनल कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही।
आयोजन की सफलता में विशेष योगदान के लिए श्री पिंकू कुमार, डॉ. एम. मोशर्रफ हुसैन एवं श्री आशुतोष कुमार सिंह सहित इतिहास विषय के शिक्षकों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रयासों की सराहना की गई।
अधिवेशन के आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) दयानन्द रॉय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बिहार इतिहास परिषद् के सभी पदाधिकारियों, विद्वानों, शोधार्थियों तथा भागलपुर नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विशेष रूप से प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीमित समय में इतने व्यापक स्तर के राष्ट्रीय आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रधानाचार्य डॉ. अनिरुद्ध कुमार ने भी अधिवेशन की सफलता पर बिहार इतिहास परिषद् के पदाधिकारियों, देशभर से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों तथा महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों को प्रतिष्ठित इतिहासकारों के साथ संवाद करने और इतिहास के विभिन्न आयामों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
इतिहास और शोध के लिए यादगार आयोजन
बिहार इतिहास परिषद् का यह गोल्डन जुबली अधिवेशन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि बिहार के इतिहास, इतिहास-लेखन और शोध की परंपरा के 50 वर्षों की अकादमिक यात्रा को प्रतिबिंबित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा।
दो दिनों तक भागलपुर नेशनल कॉलेज का परिसर इतिहासकारों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के अकादमिक संवाद का केंद्र बना रहा। विभिन्न सत्रों, व्याख्यानों, पुस्तक लोकार्पणों और विचार-विमर्शों ने बिहार के इतिहास के अध्ययन को नए दृष्टिकोणों से देखने का अवसर प्रदान किया।
यह अधिवेशन क्षेत्रीय एवं स्थानीय इतिहास के अध्ययन, स्रोतों के संरक्षण, नई शोध-पद्धतियों तथा युवा शोधार्थियों को अकादमिक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में स्मरणीय रहेगा।
भागलपुर नेशनल कॉलेज, भागलपुर को इस ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी करने का अवसर प्राप्त होना महाविद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है।

